Wednesday, December 29, 2010

रिश्ते.......

ऊपर रखना
गुलाब सी रंगत
गहरी परतों में
अश्क़ की तासीर

ये रिश्ते अब
प्याज़ की मानिंद हुए जाते हैं.

===========================

मेरी दौलत
मेरा असबाब था तेरा रिश्ता
आड़े वक़्त के लिए
मुट्ठी में दबा रखा था

खोटे सिक्के सा
हथेली पे निशाँ छोड़ गया.

===========================

मेरे गम पर
उठा लेता है आस्माँ सर पे..
मेरी खुशियों में फलक
नूर से भर देता है

बड़ा बेअदब
वो बेजुबान रिश्ता है...

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जाने कितना
चुका चुका हूँ मैं
कितनी किश्तें
चुकाना बाकी है

वो एक रिश्ता
साहूकार के खाते सा है.

15 comments:

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

रवि शंकर जीः
सोंधीसोंधी कविताएँ... मनमोहक ख़ुशबू लिए...
1. रिश्ते हों प्याज़ की मानिंद नहीं ग़म कोई
ध्यान रखना सड़ाँध इनमें आने पाए नहीं!
2. किशन चंदर की कहानी, हाथ का मैल याद करा गई!!
3. इसने तो रिश्तों का विस्तार समझा दिया.
4. कुछ किश्तें तो आने वाली पुश्तें चुकाती हैं!! और ऐसे रिश्तों पे फ़ख्र होता है!!

Ravi Shankar said...

@ सलिल सर…
अहा…… पोस्ट पर पहला दस्तखत आपका पा कर कलम खिल उठी,सर जी। आपको पसंद आयीं क्षणिकायें इनकी खुशकिस्मती है। स्नेह बनाये रखियेगा।

नमन।

मो सम कौन ? said...

रवि,
मैंने भी प्यार और प्याज़ की समानता की बात की थी, लेकिन आपने ये जो साम्यता ढूंढी है - ऊपर गुलाबी रंगत और अंदर अश्क की तासीर - बहुत खूब।
over all में अजब रिश्ता गज़ब रिश्ता।

rashmi ravija said...

जाने कितना
चुका चुका हूँ मैं
कितनी किश्तें
चुकाना बाकी है

वो एक रिश्ता
साहूकार के खाते सा है

सारी क्षणिकाएं एक से बढ़कर एक हैं.

संजय भास्कर said...

बहुत खूब........एक से बढ़कर एक हैं.

संजय भास्कर said...

नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं

दिपाली "आब" said...

o teri.. Kya baat hai yaar, saari nazmein bahut bahut shaandaar kahi hain yaara.. Keep it up buddy

वन्दना said...

ऊपर रखना
गुलाब सी रंगत
गहरी परतों में
अश्क़ की तासीर

ये रिश्ते अब
प्याज़ की मानिंद हुए जाते हैं.


अब कहने को क्या बचा?


जाने कितना
चुका चुका हूँ मैं
कितनी किश्तें
चुकाना बाकी है

वो एक रिश्ता
साहूकार के खाते सा है.

सच कहा।

बेहतरीन ।

shikha varshney said...

अब तो सब कुछ ही प्याज की मानिंद हो गया है :)
एक से बढ़कर एक हैं सब क्षणिकाएं.
आपको नव वर्ष की ढेरों शुभकामनाएं

monali said...

Rishto k dard, ehsaan aur pyar ko samete sabhi lines behad khubsoorat hain :)

Harman said...

behtreen kavita.

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Lyrics Mantra

Dorothy said...

अनगिन आशीषों के आलोकवृ्त में
तय हो सफ़र इस नए बरस का
प्रभु के अनुग्रह के परिमल से
सुवासित हो हर पल जीवन का
मंगलमय कल्याणकारी नव वर्ष
करे आशीष वृ्ष्टि सुख समृद्धि
शांति उल्लास की
आप पर और आपके प्रियजनो पर.

आप को सपरिवार नव वर्ष २०११ की ढेरों शुभकामनाएं.
सादर,
डोरोथी.

Ravi Shankar said...

आप सबों कि शुभकामनाओं से ये नया साल कुछ अच्छी खबरें ले कर आ रहा है……पर इन फ़लित कामनाओं ने व्यस्तता कुछ बढा दी है इस कारण से आप सबों से देर से मुखातिब होता हूँ। बहुत स्नेह व धन्यवाद सबको मुझे झेलने के लिये :)

सादर।

saanjh said...

ये रिश्ते अब
प्याज़ की मानिंद हुए जाते हैं

uffffffffffff.....kamaal kitta yaara...too good

Ravi Shankar said...

:) :)....

stay blessed !

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