Monday, December 6, 2010

नन्हीं नज़्में

तुम्हारा होना……
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मुझे छू कर जो गुजरी थी
तुम्हारे अक्स की खुशबू
अब तो हर शब् मेरी सासें
यूँ ही अफरोज रहती हैं
तुम्हारा होना
"मिडास" की छुअन तो नहीं !


मोती……
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स्वाति की इक बूँद
कल मेरी आँख से गिरी थी
तेरी याद की सीपी में

एक नज्म का मोती
आज निकला है वहीँ से


सरगम……
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सा सी साँसों में घुलती जाती है
रे सी रेशमी ख्यालों में
ग सी गर्दन प गुदगुदी जैसी
म सी मुस्कान के उजालों में
प सी पनघट पे एक लहर जैसे
ध सी धडकनों में गाती हुई
नी सी निर्मला ज्यों गंगा कि
दर्द सब संग ले के जाती हुई
वो तो सरगम के सप्त -सुर सी है !

मैं जिसपे गीत लिखता जाता हूँ !

17 comments:

दिपाली "आब" said...

waah..
Teeno nazmein sundar hain.. Mujhe pehli wali bahut bhaai

केवल राम said...

स्वाति की इक बूँद
कल मेरी आँख से गिरी थी
तेरी याद की सीपी में
एक नज्म का मोती
आज निकला है वहीँ से
xxx
उम्दा ख्याल है ...प्यार के प्रति जज्बा सच्चा है ...शुभकामनायें

मनोज कुमार said...

सरगम की तान पर नन्हीं नज़्में विशाल आकार ग्रहण करती प्रतीत हो रहीं हैं। बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई!
विचार-प्रायश्चित

shikha varshney said...

वाह एक से एक बडकर एक नज्मे बहुत सुकून आया पढकर .

monali said...

Teeno hi nazme behatreen...magar 'moti' behad pasand aaya... sahitya sagar k moti ki tereh :)

rashmi ravija said...

स्वाति की इक बूँद
कल मेरी आँख से गिरी थी
तेरी याद की सीपी में

एक नज्म का मोती
आज निकला है वहीँ से

बहुत खूब..तीनो नज़्म बड़ी प्यारी सी है..

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

रवि शंकर जी! ईमान से इन तीन नज़्मों पे अपना सारा लेखन क़ुर्बान करने को जी चाहता है... इन छोटी नज़्मों को पढकर लगाकि दुनिया की बेहतरीन चीज़ें छोटे पैकेज में ही आती हैं!! मुग्ध कर दिया आपने!

संजय भास्कर said...

रवि शंकर जी
नमस्कार !
तीनो नज़्म बड़ी प्यारी सी है..

saanjh said...

awwwwww...............

chal ja, ispar bhi khit pit ni kanne di... :(

but kya likha hai, kya likha hai yaara, toooooo good.....midas touch ka itna khoobsurat istemaal pehli baar dekha...lovely
aur moti...haye, kinna pyaara moti hai....

aur sargam.....!! honestly, koi word uthakar uske har letter se ek word jodkar ek description banana...bohot dekha hai logon ko aisa karte. itne bachkaane dhang se karte the log ke i began hating the concept
par paajii....tussi te kamaal kar dittan...awwwesome....simply superb...!!!

मो सम कौन ? said...

रवि,
ईमान से कहूँ तो पहली दो नज़्में पढ़ने पर तुम और अविनाश दोनों एक ही लगते हो, और दोनों मेरे फ़ेवरेट।
सरगम बहुत ही अनूठी (है लिखूँ\ होगी ही लिखूँ?)
हा हा हा...

बहुत खूब लिखी गईं हैं तीनों नज्में, बहुत खूब।

वन्दना said...

वाह वाह……………सरगम की तान पर दिल की पुकार का रंग भरे प्यार का बहुत ही सुन्दर प्रस्तुतिकरण है।

सतीश सक्सेना said...

बहुत खूब , शुभकामनायें !

Ravi Shankar said...

@ Deepi.......

Thanks yaara ! Baaki dono to tumne pahle bhi padh rakhi hongi !

@ Keval ji... & Manoj ji....

Dhanyavaad aapka ! Hausla dete rahiyega !

@ Shikha di...

Jahenaseeb, jo aapke kadam pade yahan :) aate rahiyega !

@ Monali ji...

bade dinon baad dikhin aap ! shukriya hauslaafzaai ke liye !

Ravi Shankar said...

@ Rashmi ji...

many thanks !

@ Salil sir...

Aap to bas aashish aur sneh dete rahen sir ! :)

@ bhaskar ji...

shukriya hujur !

Ravi Shankar said...

@ Saanjhu...

tujhe thanx nahi kahunga..jaa :P

aur sach kahun to "sargam" mujhe bhi aien-vein hi lagi thi..so yahan daalna nahi chahta tha par ek dost ne force kar ke karwaya !

stay blessed !

@ Sanjay sir...

Avi bhai to bahut upar ke darze mein hai sir ji.... un se tulna badi baat hai. Aapne mujhe apni favorites ki list mein rakha hai... aapka badappan hai...

sneh banaye rakhiyega !

@ vandana ji...

bahut dhanyavaad aapka !

@ Satish ji...

bahut shukriya,nazmon tak aane ke liye !

saanjh said...

;)

शारदा अरोरा said...

bahut khoob , ye dhadkan likhti sunti hai ...sunaatee bhi hai ..

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