Friday, October 29, 2010

मोहब्बत की जलन बाकी है ..


आँख में रंज है,चेहरे पे शिकन बाकी है ..
अए जिंदगी, तेरे लहजे में थकन बाकी है ...

कटे हैं पर और कफस में हैं परिंदा भी ..
मगर निगाह में मंजिल की लगन बाकी है

हुआ ही क्या जो ये भीगी रही थी कल शब् भर
तुम्हारी आँख में मोहब्बत की जलन बाकी है ..

लाख जख्म को मरहम दिया हैं काँटों ने ..
पर अब भी पाँव में फूलों की चुभन बाकी है ..

अपनी निस्बत में सौदा तो था बराबर का ..
हमारे जिस्म पे अब तेरा कफ़न बाकी है ...

21 comments:

संजय भास्कर said...

अपनी निस्बत में सौदा तो था बराबर का ..
हमारे जिस्म पे अब तेरा कफ़न बाकी है ...
"ला-जवाब" जबर्दस्त!!
शब्दों को चुन-चुन कर तराशा है आपने .....प्रशंसनीय रचना।

संजय भास्कर said...

पसंद आया यह अंदाज़ ए बयान आपका. बहुत गहरी सोंच है

मो सम कौन ? said...

"हुआ ही क्या जो ये भीगी रही थी कल शब् भर
तुम्हारी आँख में मोहब्बत की जलन बाकी है ."

आशिक के जब आंसू निकले, और अगन लग जाये।

एक एक शेर गज़ब का है, बेहद शानदार अभिव्यक्ति।

संजय भास्कर said...

मेरि तरफ से मुबारकबादी क़ुबूल किजिये.

क्षितिजा .... said...

हुआ ही क्या जो ये भीगी रही थी कल शब् भर
तुम्हारी आँख में मोहब्बत की जलन बाकी है ..

kya kahoon gazal ke baare mein ... har sher kamaal ka hai ... phir bhi koshish kar jo sabse jyada pasand aaya wo ye hai .... bahut khoobsurat taseer gazal ki ...

saanjh said...

kya baat hai yaara...very good ji...;) nice to see u writing a ghazal. aur kya khoob likha hai...har sher chubhta hai..har sher laajawaab...amazing.

haan, beher par thoda kaam kiya ja sakta hai...but that aint no biggie...we love wut u write buddy :)

take care

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

पूरी गजल ही बेहतरीन है..

monali said...

I just loved it..nt sure if i cud understand da depth bt surely i liked it :)

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

कटे हैं पर और कफस में हैं परिंदा भी ..
मगर निगाह में मंजिल की लगन बाकी है

waah waah kya baat hai ... behatreen!

Aashu said...

लाख जख्म को मरहम दिया हैं काँटों ने ..
पर अब भी पाँव में फूलों की चुभन बाकी है ..

waah!

http://draashu.blogspot.com/2010/10/blog-post_25.html

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

कटे हैं पर और कफस में हैं परिंदा भी ..
मगर निगाह में मंजिल की लगन बाकी है

हुआ ही क्या जो ये भीगी रही थी कल शब् भर
तुम्हारी आँख में मोहब्बत की जलन बाकी है

बहुत सुन्दर ...बस यह जलन ही बनी रहनी चाहिए :)

उस्ताद जी said...

6/10

अए जिंदगी, तेरे लहजे में थकन बाकी है..
आपका अंदाज काफी जुदा-जुदा सा है, जो शायरी को अलग पहचान दे रहा है. कई शेर असर पैदा कर रहे हैं

Tarkeshwar Giri said...

अपनी निस्बत में सौदा तो था बराबर का ..
हमारे जिस्म पे अब तेरा कफ़न बाकी है ...

दिपाली "आब" said...

ravi matle se hi flow bigda.. Yaara itti pyaari gazal mein flow nhi hai...??


Ustaad ji
maine aapse kuch poocha tha, jab tak aap mujhe jawab nhi denge main aapke har comment pr jawab maangungi.

sada said...

बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।

मनोज कुमार said...

ग़ज़ल दिल में घर कर गई है।

Udan Tashtari said...

अपनी निस्बत में सौदा तो था बराबर का ..
हमारे जिस्म पे अब तेरा कफ़न बाकी है ...


-क्या बात है, बहुत खूब!

Shekhar Suman said...

अरे वाह क्या ग़ज़ल लिखी है..अन्दर तक उतर गयी.. बहुत खूब ...आपको सलाम करने को जी चाहता है...

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

रवि शंकर जी! बहुत सम्भावनाएँ हैं आपकी कलम में... लेकिन एक बात का ध्यान रखें, ग़ज़ल में बहर की गड़बड़ या बेमेल बहर पूरी गज़ल का मज़ा ख़राब कर देती है! इसका ध्यान रखें, बस बाक़ी तो आपकी कलम कर देगी!

Ravi Shankar said...

@ संजय भास्कर ji...

Aap teen martaba aaye rachna par. bahut aabhaar aapka !

@ मो सम कौन ji...

Bahut dhanyavaad Sanjay ji ! Aapki upasthiti kalam ko hausla deti hai !

@ क्षितिजा ji....

Aapko taaseer pasand aayi ghazal ki,kalam khil uthi! dhanyavaad !

@ Buddy...

Yes buddy, be-behari to hai ghazal kai jagah... asal mein kai baar mein behar par dhyaan nahi deta kuchh laparwaahi kah lo kuchh waqt ki kami..aur kuchh kalam ka kachchapan.

waise aage koshish jaroor rahegi sudharne ki ! thanks nahi kahunga tujhe.. :)

@ भारतीय नागरिक - Indian Citizen ..

Shukriya Bandhu !

@ monali ji...

Its just ur affection towards me. thanx.

@ Indranil Bhattacharjee ........."सैल"

bahut shurkiya "shail" ji..

@ Aashu ji...

many thanks !

@ संगीता di...

Naman !

@ Shriman

Sheron ka asar aap tak pahuncha... ghazal pulak uthi! Dhanyavaad !

@ Tarkeshwar Giri ji..

Shurkiya bandhu !

@ Deepi...

Thanks yaara... aur flow ki gadbad koshish karunga aage na ho !

@ sada ji..

@ Manoj ji..

@ Udan Tashtari ji..

@ Shekhar Suman ji

@ Salil sir....

Aap sab ki jarra-nawaazi hai ki aapne is kachchi ghazal ko itna sneh diya ! Kalam dhanyavaad kati hai !

Vandana Singh said...

waaaaaaaaaah !!!

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