Saturday, August 1, 2009

तुम्हारी याद तो खुदा सी है


मेरे लम्हों को उम्र बख्शी है ..
तुम्हारी याद तो खुदा सी है ..

तुम्हारा लम्स हैं गुलों पे अभी ,
इनमे खुशबू जो ये बला सी है ..

राज कुछ हैं तेरे तबस्सुम में ,
इसके परदे में एक उदासी है..

सांस की लौ धुआं होने को है ...
जख्म ताजा हैं , जिस्म बासी है

अब सिमटने ही को हैं उम्र--सफ़र ...
बस कि दुश्वारी इक जरा सी है ...

तेरी सूरत हैं मेरा आब - -जमजम ...
, कि सदियों से रूह प्यासी है ...

4 comments:

Shayaar said...

मेरे लम्हों को उम्र बख्शी हैं ..
तुम्हारी याद तो खुदा सी हैं ..

तुम्हारा लम्स हैं गुलों पे अभी ,
इनमे खुशबू जो ये बला सी हैं ..

राज कुछ हैं तेरे तबस्सुम में ,
इसके परदे में एक उदासी हैं ..

सांस की लौ धुआं होने को हैं ...
जख्म ताजा हैं , जिस्म बासी हैं

Mind blowing fren...kya baat hai kya baat hai...jz awesome!!

--Gaurav

saanjh said...

hi there old buddy... ;)

ghazal to mast hai, lovely. pehla sher...killer!

Ravi Shankar said...

shurkiya gaurav bhai !

Ravi Shankar said...

oye buddy ! Tumko dekh ke jo mahsoos kiya vo bata nahi sakta.... !

Keep smiling n stay blessed !

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