Monday, March 26, 2012

नयनन छवि, पी की बसे मोरे रामा ...

नयनन छवि, पी की बसे मोरे रामा ...
धरम कहे, मति हरि संग जोडूँ 
सदगति, सतफल  पाऊं ....
करम कहे बस जगतहीं उलझूं    ..
व्यर्थ न मन भरमाऊं ..

मन जोगी सुध कोई न ले जोई
पी परे कोई न कामा ssss...
नयनन छवि, पी की बसे मोरे रामा ...!

दिन बीते पथ इक टुक  तकते
निशि बीते सपनाहीं ......
काल -पहर सब बीतत जैहें ...
पीऊ पर आवत नाही ....

हरि विनती मुख कौन करूँ जिस
मुख पीऊ आठों यामाssss ....
नयनन छवि, पी की बसे मोरे रामा !!

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
आस्था -अनास्था ,सफलता और संघर्ष के निरंतर  द्वन्द से गुजरते हुए बस एक ही संबल होता है मेरा .... यह गीत उसी दिव्य और पवित्र विश्वास को समर्पित है.

18 comments:

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

अनुज!! कमाल की कनेक्टिविटी है... बस एक घोर समाधि, एक आत्यंतिक आनंद!!

क्षितिजा .... said...

बहुत प्यारी रचना है रवि जी ...

***Punam*** said...

दिन बीते पथ इक टुक तकते
निशि बीते सपनाहीं ......
काल -पहर सब बीतत जैहें ...
पीऊ पर आवत नाही ....

dard bhari pukaar...
vo zaroor sunega...!!

Smriti Sinha said...

कुछ लिख पाने के लिए शब्द ढूंढ रही हूँ काफी देर से....मिल ही नहीं रहे!!

दिगम्बर नासवा said...

अंतस में उतरता ... सीधे मन में प्रभाव करता ... सुन्दर रचना ..

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार said...





दिन बीते पथ इक टुक तकते
निशि बीते सपनाहीं ......
काल -पहर सब बीतत जैहें ...
पीऊ पर आवत नाही ....

वाह ! अति उतम !

आदरणीय रविशंकर जी
सस्नेहाभिवादन !

लगा जैसे आपका गीत नहीं , कबीर रैदास की वाणी पढ़ रहा हूं …
बहुत सुंदर !

~*~नवरात्रि और नव संवत्सर की बधाइयां शुभकामनाएं !~*~
शुभकामनाओं-मंगलकामनाओं सहित…
- राजेन्द्र स्वर्णकार

संजय @ मो सम कौन ? said...

संबल है तो द्वन्द्व की कोई चिंता नहीं, एकदम सात्विक भाव।
हर संघर्ष के लिये शुभकामनायें, अनुज।

expression said...

खूबसूरत!!!!!!!!!!!!!!!

खुशबु की जुबां तो बोलनी ही पड़ेगी....

मद-मस्त.............

अनु

expression said...

खूबसूरत!!!!!!!!!!!!!!

खुशबू की जुबाँ में बोलना ही पड़ेगा..........

मद-मस्त.....

अनु

expression said...

खूबसूरत!!!!!!!!!!!!!!

खुशबू की जुबाँ में बोलना ही पड़ेगा..........

मद-मस्त.....

अनु

Avinash Chandra said...

एक शब्द... आमीन!

Amrita Tanmay said...

रोम-रोम में प्रार्थना भाव उमग रहा है..

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार said...

.

क्या बात है बंधुवर !
नई रचना को बहुत समय हो गया …
आशा है आप सपरिवार स्वस्थ-सानन्द हैं …

शुभकामनाओं सहित…
राजेन्द्र स्वर्णकार

Ramakant Singh said...

rijh bhaje ke khijh ......
behatarin bol aur behatarin GAYAN
BADHAI

ब्लॉग बुलेटिन said...

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन ब्लॉग बुलेटिन: कोई दूर से आवाज़ दे चले आओ मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

vandana gupta said...

इन्ही हालात से गुजरते हैं सब मुरलीधर श्याम मिलते हैं तब्………… सुन्दर भाव

Mukesh Kumar Sinha said...

आनंद देती रचना
सुंदरतम

ब्लॉग बुलेटिन से यहाँ पहुँचना अच्छा लगा :)

Amrita Tanmay said...

समय निकाल कर अपने पाठकों भी तृप्त करें...

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